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0 commentSaturday, 1 June 2013
अच्युताय गुलकंद(Achyutaya Gulkand)

(प्रवालपिष्टी युक्त)


पित्तनाशक,मधुर,शीत,68 प्रकार के वायुदोष,अनिमिआ ,रक्ताल्पता,शरीर की जलन,विविध स्त्री रोगों मे व विद्यार्थियों के लिए विशेष गुनकारी ।



0 commentTuesday, 28 May 2013

अच्युताय आँवला चूर्ण(Achyutaya Amla Churna)

ऊर्जावर्धक, शक्तिदायक,धातुरक्षक व पौष्टिकता से पूर्ण ।
(संपूर्ण परिवार के लिऐ)


शक्ति व वीर्यवर्धक ,त्रिदोषनाशक ,असमय बालों का सफेद होना व झड़ना रोकता है।नेत्ररोग,स्वप्नदोष,प्रदररोग एवं स्त्रियों के मासिक धर्म संबंधी सभी रोगों मे लाभदायी ।

(1)Product Name :- Achyutaya Amla Churna
(2)Quantity :- 400 g. / 265 g.

(3)Direction For Use :- 2 to 4 g. churna at night ( Dose depends upon age, weight & illness of the individuals). OR as directed by physician.
       Note :- Do not take milk 2 hr. before & 2 hr. after medicine.
(4)Benefits :- Amla Churna Increase production of ras & veerya.
             Useful in pittaj disorders, such as internal hotness, burning eyes, hyperacidity,burning soles etc.
             It controls spermatorrhoea, night fall, leucorrhoea, menorrhagia.
             It clears constipation & increase apetite.
(5)Main Ingredients :- Emblica officinalis(amla), Sugar. 





0 commentWednesday, 10 April 2013

होमियो तुलसी गोलियॉ(Homoeo tulsi pills)

हृदयरोग,दमा,हिचकी ,
विष-विकार,श्वास-खाँसी,
प्रतिश्याय,खून की कमी,
दंत रोग मे चमत्कारी
लाभ मिलता है। साथ ही ये
शिरः शूल,प्रजनन तथा
मूत्रवाही संस्थान के रोगों

की श्रेष्ठ औषधि हैं ।





0 commentMonday, 11 March 2013


रसायन चूर्ण(Rasayan Churna)


लाभ : आयुर्वेद के अनुसार 40 साल की उम्र के बाद निरोग 
एवं दीर्घ आयुष्य के लिए रसायन का सेवन करना चाहिए
यह शक्ति,स्फूर्ति व ताजगी देनेवाला, बीमारियों का नाश
करनेवाला एवं वृद्धावस्था को दूर रखनेवाला है यह
जीर्णज्वर,वीर्यदोष,मूत्र-सबंधी विकार, स्वप्नदोष में
अत्यंत लाभदायी है बढती उम्र के साथ आनेवाली कमजोरी
एवं बीमारियों से यह रक्षा करता है
मात्रा व सेवनविधि : 2 से 3 गोलियाँ दूध, घी, शहद या
पानी के साथ ले सुबह दातुन के बाद चूसकर सेवन करेने
से विशेष लाभ होता है

(1)Product Name :- Rasayan Churna
(2)Quantity :- 100 g.
(3)Direction For Use :- 2 to 4 g. churna morning empty stomach with 1 t.s.f.ghee + ½ t.s.f. honey .( Dose depends upon age, weight & illness of the individuals). OR as directed by physician.
(4)Benefits :- Rasayan Churna protects from the diseases, delayed aging &  improves immunity.
              Very Useful in disease of genito-urinary tract. viz.
         (1)Maintain vitality of surviving neurons in CRF.
         (2)Improves recovery in ARF & prevents progression                    to CRF.
         (3)Glomerulonephritis.
         (4)Prevents recurrence in chronic & acute UTI.
         (5)Decrease irritative symptoms in BEP (Benign  Enlargement of Prostate).
         (6)Useful in detruser instability.
         (7)Useful in night fall, spermatorrhoea etc.
(5)Main Ingredients :- Tinospora cordifolia (Giloy) & other medicine that inceases immunity power.













0 commentSunday, 10 March 2013



अच्युताय रसायन टेबलेट(Achyutaya Rasayan Tablet)



लाभ : आयुर्वेद के अनुसार 40 साल की उम्र के बाद निरोग 
एवं दीर्घ आयुष्य के लिए रसायन का सेवन करना चाहिए
यह शक्ति,स्फूर्ति व ताजगी देनेवाला, बीमारियों का नाश
करनेवाला एवं वृद्धावस्था को दूर रखनेवाला है यह
जीर्णज्वर,वीर्यदोष,मूत्र-सबंधी विकार, स्वप्नदोष में 
अत्यंत लाभदायी है बढती उम्र के साथ आनेवाली कमजोरी
एवं बीमारियों से यह रक्षा करता है
मात्रा व सेवनविधि : 2 से 3 गोलियाँ दूध, घी, शहद या
पानी के साथ ले सुबह दातुन के बाद चूसकर सेवन करेने
से विशेष लाभ होता है

(1)Product Name :- Achyutaya Rasayan Tablet
(2)Quantity :- 50 g.
(3)Direction For Use :- 2 to 3 tab. morning empty stomach with 1 t.s.f.ghee + ½ t.s.f. honey / milk. ( Dose depends upon age, weight & illness of the individuals). OR as directed by physician.
(4)Benefits :- Rasayan Tablet protect from the disease and delayed aging &  improve immunity.
              Very Useful in disease of genito-urinary tract. viz.
         (1)Maintain vitality of surviving neurons in CRF.
         (2)Improves recovery in ARF & prevents progression   to CRF.
         (3)Glomerulonephritis.
         (4)Prevents reccurence in chronic & recurrent UTI.
         (5)Decrease irritative symptoms in BEP (Benign  Enlargement of Prostate).
         (6)Useful in detruser instability.
         (7)Useful in night fall, spermatorrhoea etc.
(5)Main Ingredients :- Emblica officinalis(amla), Tinospora cordifolia(Giloy)  etc. 














0 commentThursday, 14 February 2013
शय्यामूत्र का इलाज(Treatment of enuresis)

जामुन की गुठली को पीसकर चूर्ण बना लो। इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा पानी के साथ देने से लाभ होता है।
रात को सोते समय प्रतिदिन छुहारे खिलाओ।
200 ग्राम गुड़ में 100 ग्राम काले तिल एवं 50 ग्राम अजवायन मिलाकर 10-10 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार चबाकर खाने से लाभ होता है।
रात्रि को सोते समय दो अखरोट की गिरी एवं 20 किशमिश 15-20 दिन तक निरन्तर देने से लाभ होता है।
सोने से पूर्व शहद का सेवन करने से लाभ होता है। रात को भोजन के बाद दो चम्मच शहद आधे कप पानी में मिलाकर पिलाना चाहिए। यदि बच्चे की आयु छः वर्ष हो तो शहद एक चम्मच देना चाहिए। इस प्रयोग से मूत्राशय की मूत्र रोकने की शक्ति बढ़ती है।

पेट में कृमि होने पर भी बालक शय्या पर मूत्र कर सकता है। इसलिए पेट के कृमि का इलाज करायें।


0 commentMonday, 11 February 2013

स्त्री-रोग(Female-Diseases)



श्वेत प्रदर (Leucorrhoea)

 

श्वते प्रदर में पहले तीन दिन तक अरण्डी का 1-1 चम्मच तेल पीने के बाद औषध आरंभ करने पर लाभ होगा। श्वेतप्रदर के रोगी को सख्ती से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।

पहला प्रयोगः आश्रम के आँवला-मिश्री के 2 से 5 ग्राम चूर्ण के सेवन से अथवा चावल के धोवन में जीरा और मिश्री के आधा-आधा तोला चूर्ण का सेवन करने से लाभ होता है।

दूसरा प्रयोगः पलाश (टेसू) के 10 से 15 फूल को 100 से 200 मि.ली. पानी में भिगोकर उसका पानी पीने से अथवा गुलाब के 5 ताजे फूलों को सुबह-शाम मिश्री के साथ खाकर ऊपर से गाय का दूध पीने से प्रदर में लाभ होता है।

तीसरा प्रयोगः बड़ की छाल का 50 मि.ली. काढ़ा बनाकर उसमें 2 ग्राम लोध्र चूर्ण डालकर पीने से लाभ होता है। इसी से योनि प्रक्षालन करना चाहिए।

चौथा प्रयोगः जामुन के पेड़ की जड़ों को चावल के मांड में घिसकर एक-एक चम्मच सुबह-शाम देने से स्त्रियों का पुराना प्रदर मिटता है।

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ


रक्तप्रदर (Menorrhagia)

 

पहला प्रयोगः आम की गुठली का 1 से 2 ग्राम चूर्ण 5 से 10 ग्राम शहद के साथ लेने से या एक पके केले में आधा तोला घी मिलाकर रोज सुबह-शाम खाने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।

दूसरा प्रयोगः 10 ग्राम खैर का गोंद रात में पानी में भिगोकर सुबह मिश्री डालकर खाने से अथवा जवाकुसुम (गुड़हल) की 5 से 10 कलियों को दूध में मसलकर पिलाने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।

तीसरा प्रयोगः अशोक की 1-2 तोला छाल को अधकूटी करके 100 ग्राम दूध एवं 100 ग्राम पानी में मिलाकर उबालें। केवल दूध रहने पर छानकर पीने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।

चौथा प्रयोगः गोखरू एवं शतावरी के समभाग चूर्ण में से 3 ग्राम चूर्ण को बकरी या गाय के सौ ग्राम दूध में उबालकर पीने से रक्तप्रदर में लाभ होता है।

पाँचवाँ प्रयोगः कच्चे केलों को धूप में सुखाकर उसका चूर्ण बना लें। इसमें से 5 ग्राम चूर्ण में 2 ग्राम गुड़ मिलाकर रक्तप्रदर की रोगिणी स्त्री को खिलाने से लाभ होगा। इस चूर्ण के साथ कच्चे गूलर का चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर प्रतिदिन प्रातः-सायं 1-1 तोला सेवन करने से ज्यादा लाभ होता है।

सावधानीः उपचार के दौरान लाभ न होने तक आहार में दूध व चावल ही लें। बुखार हो तो उन दिनों उपवास करें।

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ


मासिक पीड़ा

 

कन्यालोहादिवटी की दो-दो गोलियां सुबह-शाम लें।

मासिक अधिक होने पर

 

काली मिट्टी की पट्टी पेट पर बाँधने से, पीपल के पाँच पत्ते रोज तीन बार खाने से एवं बबूल के 5 से 10 ग्राम गोंद का सेवन करने से लाभ होता है।

मासिक बंद होने पर

अरण्डी के पत्तों पर थोड़ा सा अरण्डी का ही थोडा सा गर्म तेल लगाकर पेट पर बाँधने से एवं तिल के 50 मि.ली. काढ़े में सोंठ, काली मिर्च, लेंडीपीपर, हींग और भारंग की जड़ का 3 ग्राम चूर्ण डालकर पीने से लाभ होता है।






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