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अच्युताय सुवर्णप्राश टेबलेट (Achyutaya Suvarna Prash Tablet)


सुवर्ण भस्म से पुष्य नक्षत्र में बनाई यह पुण्यदायी गोली आयु,शक्ति,मेधा,बुद्धि,कांति व जठराग्निवर्धक तथा ग्रहबाधा निवारक, उत्तम गर्भपोषक है ।गर्भवती स्त्री इसका सेवन करके निरोगी,तेजस्वी ,मेधावी संतती को जन्म दे सकती है ।

Suvarna Prash Tablet:
Benefits :- This Suvarnaprash(complete brain tonic) is enriched with pure gold & keshar is best tonic for the intellectual, mental & physical growth of body.
When use daily from the frist day of life to 2 yr. of age child becomes shrutidhar(highest grasping power), healthy and becomes immune to commen childhood illnesses.
Also after 2 yr. of age improves all three aspect of memory(grasping, storage & recollection), physical strength, glow, immunity power in children & in other age groups. Prevent age related degenerative CNS disorders viz. alzheimer’s disease, parkinsonism etc.
When use by pregnant lady specifically from 3rd to 9th month helps in development of brain & other part of body, prevents congenital malformation in fetus and also maintain health of mother. She will have a medhavi, Tejasvi & healthy baby.

Direction For Use :-
  • 1st day of life to 15 days – 1/8 tab. once a day.
  • 15 days to 3 month – ¼ tab. once a day.
  • 3 month to 6 month - ½ tab. once a day.
  • 6 month to 2 yr. - 1 tab. once a day.
  • 2 yr. to 5 yr. - 1 tab. twice a day.
  • ≥ 5 yr. - 2 tab. twice a day.
With cow’s milk / ghee on empty stomach OR as directed by physician.

Main Ingredients :- Suvarna Bhasma, Saffron(keshar), Suvarna makshika Bhasma, Acorus Calamus(Vacha) & other medicine that act as a brain tonic.




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गर्भस्थापक और गर्भरक्षा करने वाले अनुभूत प्रयोग

गर्भधारण

पहला प्रयोगः शिवलिंगी के 9-9 बीज दूध या पानी में घोंटकर प्रातःकाल खाली पेट मासिक के पाँचवें दिन से चार दिन तक लेने से लाभ होता है।
दूसरा प्रयोगः अश्वगंधा के काढ़े में घृत पकाकर यह घृत एक तोला मात्रा में ऋतुकाल में स्त्री यदि सेवन करे तो उसे गर्भ रहता है। (एक किलो अश्वगंधा के बोरकूट चूर्ण को 16 लीटर पानी में उबालें। चौथाई भाग अर्थात् 4 लीटर पानी रह जाने पर उसमें 1 किलो घी डालकर उबालें। जब केवल घी बचे तब उसे उतारकर डिब्बे में भर लें। यही घृत पकाना है।)
तीसरा प्रयोगः दूध के साथ पुत्रजीवा की जड़, बीज अथवा पत्तों के एक तोला चूर्ण को लेने से, ब्रह्मचर्य का पालन करने से, तीन महीने तक यह प्रयोग करने से बाँझ को भी संतान प्राप्ति हो सकती है। जिनके बालक जन्मते ही मर जाते हों उनके लिए भी यह एक अकसीर प्रयोग है। पुत्रजीवा के बीजों की माला पहनने से भी लाभ होता है।

गर्भस्थापक

रात को किसी मिट्टी के बर्तन में 25 ग्राम अजवायन, 25 ग्राम मिश्री 25 ग्राम पानी में डुबाकर रखें। सुबह उसे ठण्डाई की नाईं पीसकर पियें।
भोजन में बिना नमक की मूँग की दाल व रोटी खायें। यह प्रयोग मासिक धर्म के पहले दिन से लेकर आठवें दिन तक करना चाहिए।

गर्भरक्षा

प्रथम प्रयोगः जिस स्त्री को बार-बार गर्भपात को जाता हो उसकी कमर में धतूरे की जड़ का चार उँगल का टुकड़ा बाँध दें। इससे गर्भपात नहीं होगा। जब नौ मास पूर्ण हो जाय तब जड़ को खोल दें।
दूसरा प्रयोगः जौ के आटे को एवं मिश्री को समान मात्रा में मिलाकर खाने से बार-बार होने वाला गर्भपात रुकता है।



सुन्दर बालक के लिए

नारियल का पानी पीने से अथवा नौ महीने तक रोज बबूल के 5 से 10 ग्राम पत्ते खाने से गर्भवती स्त्री गौरवर्णीय बालक को जन्म देती है। फिर चाहे माता-पिता श्याम ही क्यों न हों।


गर्भिणी की उलटी


बेल का 5 ग्राम गूदा एवं धनिया का 50 मि.ली. पानी मिलाकर पीने से अथवा कपूरकाचली के 2 ग्राम चूर्ण को 10 मि.ली. गुलाबजल में मिश्रित करके लेने से गर्भिणी की उल्टी शांत होती है।


गर्भिणी के पेट की जलन


10-15 मुनक्के का सेवन करने से अथवा बकरी के 100 से 200 मि.ली. दूध में 10 से 20 ग्राम सोंठ पीसकर लेने से लाभ होता है।






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