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0 commentSunday, 2 June 2013
अच्युताय आँवला रस(Achyutaya Amla Rus)


गर्मीनाशक,वीर्यवर्धक,पाचक।अमृत फल आँवला रोगी और निरोगी सभी मनुष्यों के लिए उत्तम रसायन है ।इसका रस पौष्टिक,केशवर्धक,रक्तशुद्धि करने वाला रूचिकर,मूत्रल,त्रिदोषनाशक,टूटी हड्डियों को जोडने मे सहायक ,कांतिवर्धक,नेत्रज्योतिवर्धक,दाँतो को मजबूती देने वाला, सप्तधातुओं को पुष्ट करने वाला ,बवासीर ,अजीर्ण, क्षय आदि रोगों मे लाभदायक है ।यह बालों की जडे मजबूत बनाता है ।इसके सेवन से बाल काले होते है ,पाचनतँत्र मजबूत होता है,दीर्घायु और यौवन प्राप्त होता है ।



अमृतफल आँवला

आँवला चाहे हरा हो या सूखा, जो भी इसका नियमित सेवन करेगा, उसकी जीवनशक्ति में प्रचंड वृद्धि होगी, वह निरोग रहेगा। 

आँवला मस्तिष्क को तेज, श्वासरोगों को दूर, हृदय को मजबूत और नेत्रज्योति व आँतों की कार्यशक्ति में वृद्धि तो करता ही है, साथ ही यकृत को स्वस्थ बनाकर पाचनशक्ति में वृद्धि भी करता है। यह रक्तशुद्धि एवं रक्तसंचार में गुणकारी है तथा वीर्य का स्रोत है। यह आयुवर्धक तथा सात्विक वृत्ति उत्पन्न करके ओज एवं कांति कोबढ़ाने वाला है। 

आँवले को विटामिन 'सीका भंडार कहा जाता है। स्वस्थ रहने के लिए हमें रोज जितनी मात्रा में विटामिन 'सीकी आवश्यकता होती है, वह केवल एक आँवला ही पूरा कर सकता है। 

विटामिन 'सी' शरीर के लगभग 300 कार्यों में अत्यधिक सहायक होता है। मस्तिष्क के कार्यों में विटामिन 'सीकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए साधकों को नियमित रूप से आँवले का सेवन करना चाहिए। 
संतरे की तुलना में आँवले में 20 गुना ज्यादा विटामिन 'सीपाया जाता है। 100 ग्राम आँवले में 600 मिलीग्राम विटामिन 'सीहोता है, जबकि 100 ग्राम संतरे में 30 मि.ग्रा. ही विटामिन 'सी'होता है और सेवफल की तुलना में आँवले में 160 गुना विटामिन 'सीतथा 3 गुना प्रोटीन होता है। आश्चर्य की बात यह है कि आँवले को उबालने, पीसने, भाप में पकाने या सुखाने पर भी उसमें उपस्थित विटामिन 'सीकी मात्रा में कमी नहीं आती है। यह गुण किसी भी अन्य फल या साग-सब्जी में नहीं होता। 

मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होने से महिलाओं में आने वाली कमजोरी आँवले के सेवन से कम होती है।

रोज लगभग 20 से 30 ग्राम आँवले का मुरब्बा या चूर्ण खाने से भरपूर विटामिन 'सीमिलता है, साथ ही पेट भी साफ रहता है। हृदय रोग में आँवले का मुरब्बा लाभकारी है। मधुमेह के रोगियों को ठंडी के मौसम में ताजे आँवले चबाकर खाने से या उसके रसपान से लाभ होता है। ठंडी के मौसम में 3-4 महीने तक रोज 2-3 ताजे आँवले का रस सुबह खाली पेट पीने से शरीर की सुस्ती व कमजोरी दूर होती है। बुखार में आँवले के रस का सेवन करने से मरीज को कमजोरीनहीं आती।

सुबह खाली पेट आँवले का सेवन करने से अधिक लाभ होता है। इससे हल्का बुखार, प्यास, जलन मिटती है। दाल-सब्जी पकाते समय उसमें आँवला डालकर उबालने से भी उसकी पौष्टिकता में वृद्धि होती है। कैंसर तथा टी.बी. जैसी खतरनाक व्याधियाँ भी आँवले के उपयोग से रोकी जा सकती हैं। स्नान करते समय आँवलों के चूर्ण का गाढ़ा घोल या उनका ताजा रस लगाकर स्नान करने से शरीर में निखार आता है और बाल रेशम जैसे मुलायम हो जाते हैं।

''जो मनुष्य आँवले के फल और तुलसीदल से मिश्रित जल से स्नान करता है, उसे गंगास्नान का फल मिलता है।'' (पद्म पुराण, उत्तर खण्ड)

भोजन के पहले 1-2 हरे आँवले खाने से पाचनशक्ति बढ़ती है। भोजन के बीच-बीच में हरे आँवले के टुकड़े चबाकर खाने से पाचनक्रिया में सहायता मिलती है। भोजन के बाद आँवले खाने से अम्लपित्त के कारण पेट तथा गले में होने वाली जलन शांत होती है।

सावधानीः प्रसूता स्त्रियों को आँवले नहीं खाने चाहिए। अतिशय ठंडे वातावरण में शीत और नाजुकप्रकृतिवाले व्यक्तियों को कच्चे आँवले या उनके रस का उपयोग नहीं करना चाहिए। आँवले अत्यन्त शीतल होते हैं अतः सर्दी, खाँसी, कृमि, गठिया, बुखार, मंदाग्नि आदि आम, कफ व शीत प्रधान व्याधियों में मिश्री मिली हुई आँवले की सामग्रियों का त्याग करें। ऐसे व्यक्तियों को आँवले को गर्म करके या उष्ण-तीक्ष्ण द्रव्यों के साथ (जैसे चटनी बना के) उपयोग करना चाहिए।

औषधीय प्रयोग
जो मनुष्य आँवले का रस 10 से 15 मि.ली. शहद 10 से 15 ग्राम, मिश्री 10 से 15 ग्राम और घी 20 ग्राम मिलाकर चाटता है तथा पथ्य भोजन करता है, उससे वृद्धावस्था दूर रहती है।

हर्र, बहेड़ा, आँवला, घी-मिश्री संग खाय।
हाथी दाबै बगल में, तीन कोस ले जाय।।

हर्र, बहेड़ा, आँवला, जो शहद में खाय।
काँख चाप गजराज को, पाँच कोस ले जाय।। 

हर्र, बहेड़ा, आँवला, चौथी डाल गिलोय।
पंचम जीरा डाल के, निर्मल काया होय।।


इस प्रयोग से शरीर में गर्मी, रक्त, चमड़ी तथा अम्लपित्त के रोग दूर होते हैं और शक्ति मिलती है।
आँवला घृतकुमारी के संग पीने से पित्त का नाश होता है।
15-20 मि.ली. आँवलों का रस तथा एक चम्मच शहद मिलाकर चाटने से आँखों की रोशनी वृद्धि होती है।
सर्दी या कफ की तकलीफ हो तो आँवले के 15-20 मि.ली. रस या 1 ग्राम (पाव चम्मच) चूर्ण में 1 ग्राम हल्दी मिलाकर लें।

1-2 आँवले और 10-20 ग्राम काले तिल रोज सुबह चबाकर खाने से स्मरणशक्ति तेज हो जाती है।

आँवले का रस और शुद्ध शहद समान मात्रा में लेकर मिला लें। इस मिश्रण को प्रतिदिन रात के समय आँखों में आँजने से आँखों का धुँधलापन कम हो जाता है। इस मिश्रण को पीने से भी फायदाहोता है।

मैंले दाँत चमकाने हों तो दाँतों पर आँवले के रस से मालिश करें। आँवले के रस में सरसों का तेल मिलाकर मसूड़ों पर हलकी मालिश करने से भी बहुत फायदा होता है।
250 ग्राम आँवले के चूर्ण में 50 ग्राम लहसुन पीसकर यह मिश्रण शहद में डुबाकर पंद्रह दिन तक धूप में रखें। उसके पश्चात हर रोज एक चम्मच मिश्रण खा लें। यह एक उत्तम हृदय-पोषक है। यह प्रयोग हृदय को मजबूत बनाने वाला एक सरल इलाजहै।
रक्तचाप, हृदय का बढ़ना, मानसिक तनाव (डिप्रेशन), अनिद्रा जैसे रोगों में 20 ग्राम गाजर के रस के साथ 40 ग्राम आँवले का रस लेना चाहिए।
आधा भोजन करने के पश्चात हरे आँवलों का 30 ग्राम रस आधा गिलास पानी में मिलाकर पी लें। फिर शेष आधा भोजन करें। यह प्रयोग 21 दिन तक करें। इससे हृदय व मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है तथा स्वास्थ्य सुधरता है।
सूखे आँवले तथा सूखा धनिया समान मात्रा में लेकर रात को कुल्हड़ में इकट्ठे भिगो दें। सुबह छान के मिश्री मिलाकर पियें। इससे पेशाब की जलन दूर होती है तथामूत्ररोगों में लाभ होता है।

दो चम्मच कच्चे आँवले का रस और दो चम्मच कच्ची हल्दी का रस शहद के साथ लेने से प्रमेह मिट जाता है। कुछ दिनों तक प्रयोग करने से मधुमेह नियंत्रण में आ जाता है तथा सभी तरह के मूत्र-विकारों से छुटकारा मिल जाता है।

आँवले का चूर्ण गोमूत्र में घोंटकर शरीर पर लगाने से तुरंत पित्तियाँ दब जाती हैं।






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अच्युताय गुलकंद(Achyutaya Gulkand)

(प्रवालपिष्टी युक्त)


पित्तनाशक,मधुर,शीत,68 प्रकार के वायुदोष,अनिमिआ ,रक्ताल्पता,शरीर की जलन,विविध स्त्री रोगों मे व विद्यार्थियों के लिए विशेष गुनकारी ।



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अच्युताय केश पोषक(Achyutaya Natural Hair- Care)



बालों के लिए उत्तम टॉनिक ।

बालों को झड़ने  से रोककर,रूसी मिटाकर बालों को मुलायम ,काला मजबूत व लंबा बनाता है।


(1)Product Name :- Natural Hair- Care
(2)Quantity :- 100 ml.
(3)Direction For Use :- Gently apply at the hair root over the scalp. Keep for 15 to 20 minutes & then apply hair oil.
(4)Benefits :- Useful in premature graying of hairs, alopecia, seborrhic dermatitis of scalp, thin & spares hairs. Increases glow, strength & thickness of hairs & strengthen hair root.
(5)Main Ingredientns :-  Emblica officinalis(amla), Nardostachys jatamansi(jatamansi), etc.



0 commentSunday, 26 May 2013
अच्युताय गुलाब सर्बत (Achyutaya Gulab Sharbat) 


लाभ : यह शरबत अत्यन्त सुमधुर और
जायकेदार है प्यास की अधिकता, अन्तर्दाह,
ग्लानी, अवसाद, भ्रम, चित्त की अस्थिरता,
पेशाब की जलन, मूत्रकृच्छ, आँखों की जलन
तथा सुर्खी आदि विकारो को दूर करता है ।
शारीरिक व मानसिक थकावट को मिटाने
वाला, तृप्तिकारक तथा आनंददायक है ।
कितने ही लोग गर्मी के मौसम में इसका नित्य
सेवन कर गर्मी की अधिकता से होने वाले 
विकारों से बचे रहते है ।
सेवन विधि :- 20 से 40 मी.ली.तक एक
ग्लास ठंडे पानी या दूध में मिलाकर 2 से 3
बार पि सकते है ।    
                                                               
(1)Product Name :- Achyutaya  Gulab Sharbat
 (2)Quantity :- 700 ml.


(3)Direction For Use :- 20 to 40 ml once or twice a day with water / milk( Dose depends upon age, weight & illness of the individuals).  OR as directed by physician.




0 commentSaturday, 25 May 2013
 अच्युताय ब्राह्मी शर्बत  (Achyutaya  Brahmi Sharbat)

Benefits :- इस शर्बत के सेवन से ज्ञानतन्तु तथा दिमाग कि निर्बलता , यादशक्ति कि कमी , सिरदर्द , चक्कर आना, उन्माद, हिस्टीरिया(अपस्मार), वायु खून कि कमी इत्यादि दूर होकर दिमाग शांत होता हैं ! बुद्धिवर्धक तथा स्फुर्तिदायक इस शर्बत का उपयोग अति लाभदायक है!
Direction For Use :- २० से ४० ग्राम पानी के साथ दिन में दो बार लें !


0 commentFriday, 1 March 2013


 अच्युताय पलाश शर्बत(Achyutaya Palash Sharbat)


Benefits :- पलाश वृक्ष को आयुर्वेद ने ‘ब्रम्हवृक्ष’ नाम से गौरवान्वित किया है ! पलाश रसायन ( वार्धक्य एवं रोगों को दूर रखने वाला ), नेत्रज्योति बढ़ाने वाला व बुद्धिवर्धक भी है! यह मधुर व शीतल है! इसके सेवन से पित्तजन्य रोग शांत हो जाते हैं ! ग्रीष्म ऋतु की तपन से रक्षा होती है! कई प्रकार के चर्मरोग भी दूर होते है! प्रमेह (मूत्र-संबंधी विकारों ) में भी लाभदायी है !
Direction For Use :- २०-४० मि. ली. तक एक गिलास ठंडे पानी में मिलाकर २ से ३ बार पी सकते है !






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