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0 commentTuesday, 12 March 2013

हिंगादि हरड़ चूर्ण(Hingadi Harad Churna)


गैस, अम्लपित्त, कब्जियत, आफरा, डकार, सिरदर्द, अपचन, मंदाग्नि, अजीर्ण एवं पेट के अन्य छोटे-मोटे असंख्य रोगोंके अलावा चर्मरोग, लीवर के रोग, खांसी, सफेद दागकील-मुहांसे, वायुरोग, संधिवातहृदयरोग, बवासीर, सर्दी, कफ, किडनी के रोग एवं स्त्रियों के मासिकधर्म संबंधी रोगों मे लाभ होता है ।


(1)Product Name :- Hingadi Harad Churna
(2)Quantity :- 100 g.
(3)Direction For Use :- 1 to 2 g. twice a day after meal                ( Dose depends upon age, weight & illness of the individuals). OR as directed by physician.
        Note :- Do not take milk 2 hr. before & 2 hr. after medicine.
(4)Benefits :- It increases apetite & regulates peristalsis.
              Useful in gas trouble, constipation, headache, indigestion, loss of apetite, etc.
              Also useful in skin disease, liver disease, acne, rheumatoid arthritis, heart disease, piles etc.

(5)Main Ingredients:- Ferula Narthex(hing), Terminalia chebula(harad) & other medicine that increases digestive power.











 






0 commentTuesday, 26 February 2013


बवासीर का घरेलू इलाज

बवासीर दो प्रकार की होती है,खूनी बवासीर और बादी वाली बवासीर,खूनी बवासीर में मस्से खूनी सुर्ख होते है,और उनसे खून गिरता है,जबकि बादी वाली बवासीर में मस्से काले रंग के होते है,और मस्सों में खाज पीडा और सूजन होती है,अतिसार संग्रहणी और बवासीर यह एक दूसरे को पैदा करने वाले होते है।
बवासीर के रोगी को बादी और तले हुये पदार्थ नही खाने चाहिये,जिनसे पेट में कब्ज की संभावना हो,हरी सब्जियों का ज्यादा प्रयोग करना चाहिये,बवासीर से बचने का सबसे सरल उपाय यह है कि शौच करने उपरान्त जब मलद्वार साफ़ करें तो गुदा द्वार को उंगली डालकर अच्छी तरह से साफ़ करें,इससे कभी बवासीर नही होता है।
इसके लिये आवश्यक है कि मलद्वार में डालने वाली उंगली का नाखून कतई बडा नही हो,अन्यथा भीतरी मुलायम खाल के जख्मी होने का खतरा होता है,प्रारंभ में यह उपाय अटपटा लगता है,पर शीघ्र ही इसके अभ्यस्त हो जाने पर तरोताजा महसूस भी होने लगता है,इसके घरेलू उपचार इस प्रकार से है।

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जीरे को जरूरत के अनुसार भून कर उसमे मिश्री मिलाकर मुंह में डालकर चूंसने से तथा बिना भुने जीरे को पीस कर मस्सों पर लगाने से बवासीर की बीमारी में फ़ायदा होता है

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पके केले को बीच से चीरकर दो टुकडे कर लें और उसपर कत्था पीसकर छिडक दें,इसके बाद उस केले को खुले आसमान के नीचे शाम को रख दें,सुबह को उस केले को प्रात:काल की क्रिया करके खालें,एक हफ़्ते तक इस प्रयोग को करने के बाद भयंकर से भयंकर बवासीर समाप्त हो जाती है।

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छोटी पिप्पली को पीस कर चूर्ण बना ले,और शहद के साथ लेने से आराम मिलता है

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एक चम्मच आंवले का चूर्ण सुबह शाम शहद के साथ लेने पर बवासीर में लाभ मिलता है,इससे पेट के अन्य रोग भी समाप्त होते है

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खूनी बवासीर में नींबू को बीच से चीर कर उस पर चार ग्राम कत्था पीसकर बुरक दें,और उसे रात में छत पर रख दें,सुबह दोनो टुकडों को चूस लें,यह प्रयोग पांच दिन करें खूनी बवासीर की यह उत्तम दवा है

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पचास ग्राम रीठे तवे पर रखकर कटोरी से ढक दें,और तवे के नीचे आग जला दें,एक घंटे में रीथे जल जायेंगे,ठंडा होने पर रीठों को खरल कर ले या सिल पर पीस लें,इसके बाद सफ़ेद कत्थे का चूर्ण बीस ग्राम और कुश्ता फ़ौलाद तीन ग्राम लेकर उसमें रीठे बीस ग्राम भस्म मिला दें,उसे सुबह शाम मक्खन के साथ खायें,ऊपर से दूध पी लें,दोनो प्रकार के बवासीर में दस से पन्द्रह दिन में आराम आ जाता है,गुड गोस्त शराब आम और अंगूर का परहेज करें।

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खूनी बवासीर में गेंदे के हरे पत्ते नौ ग्राम काली मिर्च के पांच दाने और कूंजा मिश्री दस ग्राम लेकर साठ ग्राम पानी में पीस कर मिला लें,दिन में एक बार चार दिन तक इस पानी को पिएं,गरम चीजों को न खायें,खूनी बवासीर खत्म हो जायेगा।

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पचास ग्राम बडी इलायची तवे पर रख कर जला लें,ठंडी होने पर पीस लें,रोज सुबह तीन ग्राम चूर्ण पंद्रह दिनो तक ताजे पानी से लें,बवासीर में लाभ होता है

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हारसिंगार के फ़ूल तीन ग्राम काली मिर्च एक ग्राम और पीपल एक ग्राम सभी को पीसकर उसका चूर्ण जलेबी की पचास ग्राम चासनी में मिला लें,रात को सोते समय पांच छ: दिन तक इसे खायें,यह खूनी बवासीर का शर्तिया इलाज है,मगर ध्यान रखें कि कब्ज करने वाले भोजन को न करें
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दूध का ताजा मक्खन और काले तिल दोनो एक एक ग्राम को मिलाकर खाने से बवासीर में फ़ायदा होता है

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नागकेशर मिश्री और ताजा मक्खन इन तीनो को रोजाना सम भाग खाने से बवासीर में फ़ायदा होता है

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जंगली गोभी की तरकारी घी में पकाकर उसमें सेंधा नमक डालें,इस तरकारी को आठ दिन रोटी के साथ खाने से बवासीर में आराम मिलता है

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कमल केशर तीन मासे,नागकेशन तीन मासे शहद तीन मासे चीनी तीन मासे और मक्खन तीन मासे (तीन ग्राम) इन सबको मिलाकर खाने से बवासीर में फ़ायदा होता है

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नीम के ग्यारह बीज और छ: ग्राम शक्कर रोजाना सुबह को फ़ांकने से बवासीर में आराम मिलता है


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पीपल का चूर्ण छाछ में डालकर पीने से बवासीर में आराम मिलता है

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कमल का हरा पत्ता पीसकर उसमे मिश्री मिलाकर खायें,बवासीर का खून आना बन्द हो जाता है

* सुबह शाम को बकरी का दूध पीने से बवासीर से खून आना बन्द हो जाता है

* प्रतिदिन दही और छाछ का प्रयोग बवासीर का नाशक है

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प्याज के छोटे छोटे टुकडे करने के बाद सुखालें,सूखे टुकडे दस ग्राम घी में तलें,बाद में एक ग्राम तिल और बीस ग्राम मिश्री मिलाकर रोजाना खाने से बवासीर का नाश होता है

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गुड के साथ हरड खाने से बवासीर में फ़ायदा होता है

* बवासीर में छाछ अम्रुत के समान है,लेकिन बिना सेंधा नमक मिलाये इसे नही खाना चाहिये

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मूली का नियमित सेवन बवासीर को ठीक कर देता है





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