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0 commentWednesday, 29 May 2013


अच्युताय स्मृतिवर्धक चूर्ण (Achyutaya smurti vardhak churna)


लाभ : स्मरणशक्ति तथा धारणाशक्ति का अत्यधिक विकास होता है।अपस्मार (मिर्गी),निद्राल्पता,चिडचिडापन,उच्च रक्तचाप,चक्कर आना ,मानसिक तनाव एवं थकावट में लाभकारी ।


0 commentWednesday, 10 April 2013

होमियो तुलसी गोलियॉ(Homoeo tulsi pills)

हृदयरोग,दमा,हिचकी ,
विष-विकार,श्वास-खाँसी,
प्रतिश्याय,खून की कमी,
दंत रोग मे चमत्कारी
लाभ मिलता है। साथ ही ये
शिरः शूल,प्रजनन तथा
मूत्रवाही संस्थान के रोगों

की श्रेष्ठ औषधि हैं ।





0 commentMonday, 18 February 2013

हिस्टीरिया के निदान हेतु यह उपाय करे

> काले मुँहवाले लंगूर की लीद इकट्ठी करके उसे छाया में सुखाकर उसका पाउडर बना लें। जब रोगी को हिस्टीरिया का दौरा पड़े तब उसके मुँह से झाग-फेन आदि ठीक से साफ करके चवन्नी भर (2.5 ग्राम) पाउडर में आठ से दस ग्राम तक अदरक का रस मिलाकर उसके गले में उतार दें। दूसरे दिन ठीक उसी समय रोगी को दौरा पड़े या न पड़े, यही उपचार फिर से करें। ऐसा निरंतर पाँच दिन तक करने से हिस्टीरिया में लाभ होता है।

> मिर्गी रोगी को २५० ग्राम बकरी के दूध में ५० ग्राम मेंहदी के पत्तों का रस मिलाकर नित्य प्रात: दो सप्ताह तक पीने से दौरे बंद हो जाते हैं। जरूर आजमाएं।



चेतावनीः हिस्टीरिया व मिर्गी(Epilepsy) की ऐलोपैथिक दवाइयों लम्बे समय तक रहने से दिमाग के ज्ञानतंतु स्तब्ध एवं सुन्न होने की संभावना रहती है। 


0 commentFriday, 15 February 2013


टी.वी. अधिक देखने से बच्चों को मिर्गी................

अमृतसर मेडिकल कालेज के स्नायुतंत्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. अशोक उप्पल ने अमृतसर में हुए अखिल भारतीय सम्मेलन में कहा कि पश्चिमी देशों में टेलिविजन अधिक देखने के कारण बच्चों में मिर्गी का रोग बहुत बढ़ चुका है और अब भारत में भी ऐसे कई समाचार सुनने में आ रहे हैं। देश में अनेक चैनलों के प्रसारण के कारण बच्चे पहले की अपेक्षा अधिक समय तक टी.वी. देखते हैं। इसके दुष्परिणामस्वरूप उनमें मिर्गी रोग से ग्रस्त होने की संभावना बढ़ रही है।
सम्मेलन में यह मुद्दा विशेष रूप से चर्चित रहा।
सम्मेलन में भाग लेने वाले विभिन्न डॉक्टरों ने इस तथ्य की पुष्टि करते हुए कहाः टेलिविजन में प्रसारित कार्यक्रमों को बड़ों की अपेक्षा बच्चे अधिक ध्यानपूर्वक देखते हैं। टेलिविजन पर तेजी से बदल रहे दृश्यों का उनके मस्तिष्क में स्थित हारमोन्स पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिससे उनका दिमागी संतुलन बिगड़ जाता है। फलतः मिर्गी, अशांति, तनाव जैसे रोगों का होना तथा क्रोधी व चिड़चिड़ा स्वभाव बनना साधारण बात हो जाती है।
बच्चों के अतिरिक्त टी.वी. के अधिक शौकीन वयस्कों में भी इस प्रकार की समस्या पैदा हो सकती है। विशेषकर देर रात तक टी.वी. देखने वालों को यह रोग होने की अधिक संभावना रहती है।





0 commentThursday, 14 February 2013

अच्युताय ब्राम्ही घृत


इसके सेवन से अपस्मार ,उन्माद,बुद्धि की दुर्बलता ,मनोदोष,स्मरणशक्ति की कमी ,दिमाग की कमजोरी,वातरक्त तथा कुष्ट रोग दूर होते हैं


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