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0 commentSaturday, 1 June 2013
अच्युताय गुलकंद(Achyutaya Gulkand)

(प्रवालपिष्टी युक्त)


पित्तनाशक,मधुर,शीत,68 प्रकार के वायुदोष,अनिमिआ ,रक्ताल्पता,शरीर की जलन,विविध स्त्री रोगों मे व विद्यार्थियों के लिए विशेष गुनकारी ।



0 commentFriday, 31 May 2013
अच्युताय नीम अर्क(Achyutaya Neem Ark)


(रक्त शुद्धिकर ,पित्तशामक)


दाद, खाज, खुजली, कील - मुँहासे, रक्तप्रदर, गर्भाशय के रोग, पुराने त्वचा विकारों व आँखों के सर्व विकारों मे गुणकारी ।  दाह व पित्तशामक, पीलिया, पांडुरोग, रक्तपित्त, उलटी व यकृत के सब रोगों में लाभदायी । बाल झडना भी कम होता है ।


0 commentSunday, 26 May 2013
अच्युताय गुलाब सर्बत (Achyutaya Gulab Sharbat) 


लाभ : यह शरबत अत्यन्त सुमधुर और
जायकेदार है प्यास की अधिकता, अन्तर्दाह,
ग्लानी, अवसाद, भ्रम, चित्त की अस्थिरता,
पेशाब की जलन, मूत्रकृच्छ, आँखों की जलन
तथा सुर्खी आदि विकारो को दूर करता है ।
शारीरिक व मानसिक थकावट को मिटाने
वाला, तृप्तिकारक तथा आनंददायक है ।
कितने ही लोग गर्मी के मौसम में इसका नित्य
सेवन कर गर्मी की अधिकता से होने वाले 
विकारों से बचे रहते है ।
सेवन विधि :- 20 से 40 मी.ली.तक एक
ग्लास ठंडे पानी या दूध में मिलाकर 2 से 3
बार पि सकते है ।    
                                                               
(1)Product Name :- Achyutaya  Gulab Sharbat
 (2)Quantity :- 700 ml.


(3)Direction For Use :- 20 to 40 ml once or twice a day with water / milk( Dose depends upon age, weight & illness of the individuals).  OR as directed by physician.




0 commentThursday, 7 March 2013



अच्युताय सितोपलादि चूर्ण(Achyutaya Sitopladi Churna)

 

उपयोग : यह चूर्ण क्षय, खाँसी, जीर्णज्वर,
धातुगतज्वर, मंदाग्नि, अरुचि, प्रमेय, छाती
में जलन, पित्त विकार, खाँसी में कफ के
साथ खून आना,बालको की निर्बलता,
रात्री में ज्वर आना, नेत्र में उष्णता तथा
गले में जलन आदि विकारों को दूर करता
है । सगर्भा स्त्रियों को ३-४ मास तक सेवन
करने से गर्भ पुष्ट और तेजस्वी बनता है
मात्रा : २ से ४ ग्राम दिन में २ बार शहद
      के साथ ले  
   
(1)Product Name :-  Sitopladi Churna
(2)Quantity :- 50 g.
(3)Direction For Use :- 2 to 4 g. powder once or twice a  day on empty stomach with honey ( Dose depends upon age, weight & illness of the individuals). OR as directed by physician.
 (4)Benefits :- It acts as a mucolytic expectorant thereby useful in productive cough, dry cough, rhinorrhoea, sinusitis, asthma, bronchitis, haemoptysis, T.B.(kshay),
          It increases apetite thereby useful in long standing low grade fever, anorexia etc.
(5)Main Ingredients :- Bambusa arundinaceae(Pure vanslochan), Piper longum(pipar), Cinnamomum zeylanicum(dalchini) etc. 









0 commentFriday, 1 March 2013
    


  
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अच्युताय गुलाब महक(Achyutaya Gulab Mahak)


नाजुक त्वचा के लिए अत्यंत लाभदायी  है । इससे गर्मी   के कारण होने वाली फुन्सीयां कम होती है ।इससे दिन भर की थकान दूर होकर ताजगी आती है ।इससे त्वचा साफ होकर चेहरे की कांति बढती है ।


Benefits :- Daily use maintains natural glow, lusture & texture of skin. Useful in pimples, red skin & dark circle around eyes.
Direction For Use :-
  • Gently massage on face for 5 minutes.
  • For red & burning eyes instill 2 to 4 drops in eyes
OR as directed by physician.
Main Ingredients :- Rosa centifolia(gulab)










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 अच्युताय पलाश शर्बत(Achyutaya Palash Sharbat)


Benefits :- पलाश वृक्ष को आयुर्वेद ने ‘ब्रम्हवृक्ष’ नाम से गौरवान्वित किया है ! पलाश रसायन ( वार्धक्य एवं रोगों को दूर रखने वाला ), नेत्रज्योति बढ़ाने वाला व बुद्धिवर्धक भी है! यह मधुर व शीतल है! इसके सेवन से पित्तजन्य रोग शांत हो जाते हैं ! ग्रीष्म ऋतु की तपन से रक्षा होती है! कई प्रकार के चर्मरोग भी दूर होते है! प्रमेह (मूत्र-संबंधी विकारों ) में भी लाभदायी है !
Direction For Use :- २०-४० मि. ली. तक एक गिलास ठंडे पानी में मिलाकर २ से ३ बार पी सकते है !






0 commentTuesday, 19 February 2013

आंतरिक गर्मी(Internal heat)

पहला प्रयोगः नीम के पत्तों का 20 से 50 मि.ली. रस 5 से 20 ग्राम मिश्री मिलाकर सात दिन पीने से गर्मी मिटती है।

दूसरा प्रयोगः आम की अंतरछाल, गूलर की जड़ की छाल और बड़ के अंकुरों का 10 से 40 मि.ली. रस निकालकर उसमें 1 से 2 ग्राम जीरा और 5 से 20 ग्राम मिश्री डालकर पीने से सब प्रकार की गर्मी मिटती है।

तीसरा प्रयोगः सौंफ, जीरा एवं मिश्री रात को भिगोकर सुबह छानकर खाली पेट पीने से शरीर की गर्मी दूर होती है।

चौथा प्रयोगः नींबू के रस में मिश्री डालकर शरबत पीने से भी गर्मी में राहत होती है।

पाँचवाँ प्रयोगः कच्चे आम के छिलके उतारकर उसे पानी में उबाल लें। तत्पश्चात् उसके गूदे को ठंडे पानी में मसल-मसलकर रस बना लें व नमक, जीरा, शक्कर आदि स्वादानुसार मिलाकर पीने से गर्मी में लाभ होता है।

छठा प्रयोगः गन्ने को चूसकर नियमित सेवन करने से पेट की गर्मी व हृदय की जलन दूर होती है।

सातवाँ प्रयोगः गर्मियों में सिरदर्द हो, लू लग जाये, आँखें लाल हो जायें तब अनार का शरबत गुणकारी सिद्ध होता है।




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